
Years Of Experience
वैकल्पिक संसाधनों के साथ-साथ तकनीकी सुविधाओं एवं उन्नत कृषि प्रणालियों का प्रयोग कर ग्रामीण पलायन को कम करना।
हर पाठशाला — चाहे वर्तमान हो या भविष्य की — इन छह कार्यात्मक स्तंभों पर खड़ी है। प्रत्येक की लागत निर्धारित की जा सकती है, निविदा निकाली जा सकती है, अंकेक्षण हो सकता है, और स्वतंत्र रूप से अपनाया जा सकता है।
किसानों के विकास हेतु प्रशिक्षण, उत्पादन और विपणन से जुड़ी सेवाएं
विभिन्न योजनाओं को जोड़कर किसानों को बेहतर लाभ प्रदान करना।
अन्य क्षेत्रों में भी इस मॉडल को विकसित करने की योजना।
किसानों के उत्पादों को एकत्र कर बाजार तक पहुँचाना।
किसानों को प्रशिक्षण और संग्रहण सुविधा उपलब्ध कराना।
कृषक पाठशाला में, हमारी सेवाएँ आपको नैतिक खेती और शुद्ध,
सीधे खेत से आए ताज़े उत्पादों
के माध्यम से प्रकृति के और करीब लाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।.
झारखण्ड राज्य में कृषि के साथ बागवानी की भी अच्छी गुंजाइश है। यहाँ के जंगल, करंज, जामुन, नीम, सखुआ, सागवान, शीशम, सेमल, युक्लिष्टस, इमली, बकाईन आदि वृक्षों से भरे हुए है। जिससे शहद का उत्पादन आधिक होता है। इस तरह हम देखते है कि झारखण्ड राज्य मधुमक्खी पालन के लिए अत्यंत ही उपयुक्त है।
Learn Moreगाय पालन को बढ़ावा देने और उनसे बेहतर उत्पाद के लिए गीर प्रजाति के गायों को बढ़ावा दिया जा रहा है। गीर प्रजाति के 20 गायों से इसकी शुरुआत की गयी है। अब इन गायों की संख्या बढ़कर 28 हो गयी है।
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जल संसाधन के श्रोतों में समेकित बत्तख-सह-मछलीपालन को बढ़ावा देने के लिए इंडियन रनर और खाकी कैंपवेल प्रजाति के बत्तख और रेहू, कतला, मृगल के साथ-साथ जॉइंट तेलापिया प्रकार की मछली को संपोषित किया जा रहा है। इस पहल से एक जल श्रोत से दो से तीन प्रकार के जीविकोपार्जन उपलब्ध हो पाएंगे। इसके अतिरिक्त बत्तख के चूजों के लिए भी हैचरी इकाई की स्थापना की जा चुकी है।
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किसानों के आर्थिक विकास में पशुधन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आदिवासी क्षेत्रों में किसान मिश्रित कृषि प्रणाली यानी फसल और पशुधन का संयोजन बनाए रखते हैं, जहां एक उद्यम का उत्पादन दूसरे उद्यम का इनपुट बन जाता है, जिससे संसाधन दक्षता का एहसास होता है।
Learn Moreखूंटी में सफेद चिकन (ब्रॉयलर) और देशी किस्म के चिकन आमतौर पर पाए जाते हैं। ब्रॉयलर किस्मों की प्रजातियों की देखभाल में अधिक समय लगता है और यह रोग प्रवृत भी होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए मुर्गीपालन के लिए सोनाली प्रजाति को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह अंडा और मांस उत्पादन, तेजी से विकास और कम मृत्यु दर गहन कृषि प्रणाली के संबंध में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए सूचित किया गया है।
चूजों को एक हज़ार से दो हज़ार के बैच में 15 दिनों तक के लिए हार्डनिंग केंद्र में रखा जाता है ताकि चूजों को बीमारी से बचाते हुए रोग मुक्त बनाया जा सके।
Learn MoreScheme Progress
किसानों को कृषि उपकरण विभाग द्वारा निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
Available • Book 2 days ahead
Available • Same-day booking
Available • 1 day advance
किसानों को सामूहिक उत्पादन, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने के लिए FPO मॉडल विकसित किया जा रहा है।
पहले वर्ष में FPO का गठन किया जाएगा।
किसानों को उत्पादन और प्रबंधन का प्रशिक्षण।
उत्पादों की पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच।
5 वर्षों बाद Krishak Pathshala का हस्तांतरण FPO को।
किसानों को बेहतर तथ्यों से अवगत कराने के लिए मोडयूल भी विकसित किया जा रहा है। यह मोडयूल किसानों को खेती के विषय में मूल-भूत जानकारी प्रदान करने का एक माध्यम बनेगा।
आनेवाले दिनों में इस पार्क को अनावरण/भ्रमण केंद्र के साथ-साथ पर्यटन का केंद्र बनाने की भी योजना है। एग्रो टूरिज्म की मदद से शहरी पर्यटक खेत-खलिहान और खेती के बारे में रूचि के अनुसार जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।