बत्तख-सह-मछलीपालन

जल संसाधन के श्रोतों में समेकित बत्तख-सह-मछलीपालन को बढ़ावा देने के लिए इंडियन रनर और खाकी कैंपवेल प्रजाति के बत्तख और रेहू, कतला, मृगल के साथ-साथ जॉइंट तेलापिया प्रकार की मछली को संपोषित किया जा रहा है। इस पहल से एक जल श्रीत से दो से तीन प्रकार के जीविकोपार्जन उपलब्ध हो पाएंगे। इसके अतिरिक्त बत्तख के चूजों के लिए भी हैचरी इकाई की स्थापना की जा चुकी है।

भविष्य में हमारा उद्देश्य बत्तखों की उच्च मूल्य की नस्ल को सीमांत किसानों के बड़े वर्ग को सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराना है।

बत्तख-सह-मछलीपालन के समेकित पालन के माध्यम से न केवल लगत की कमी आती है बल्कि मुनाफे में भी बढ़ोतरी होती है। इस प्रक्रिया के दौरान बतखों के मन का प्रयोग मछलियों के लिए भोजन का काम करता है।

Duck & Fish Farming

We guide you in integrated duck and fish farming using modern and sustainable practices. This system increases farm productivity by combining poultry and aquaculture, where ducks help in natural pond fertilization and fish farming provides additional income with low input cost.

  • Pond preparation & water management guidance
  • Duck housing & breed selection
  • Fish stocking & species combination planning
  • Feed management & natural fertilization techniques
  • Health care, disease control & harvesting methods

आईएमसी (मछली) का लागत लाभ का विश्लेषण

आईएमसी (मछली) -1 एकड़ के लिए लागत लाभ विश्लेषण एक एकड़ तालाब में, 30 किलो बीज (फिंगरलिंग) की आवश्यकता होती है /1 किलो 350Rs. मृत्यु दर लगभग 20-25%

  • एक एकड़ में फिंगरलिंग की कुल लागत: 350*30=10,500
  • 30 किग्रा फिंगरलिंग में: 8000 पीस
  • अन्य खर्च चारा, चूना, दवा, श्रम और विविध सहित : 30,500
  • एक एकड़ में कुल खर्च: 41,000 रुपये
  • 1 वर्ष में IMC (मछली) की औसत वृद्धि : 1kg
  • कुल आय: 6000*160=9,60,000
  • लाभ/हानिः आय-व्यय : (960,000-41,000)
  • लाभ : 919,000